Sunday, November 23, 2025

अवैध प्रवासी—एक अनदेखी हकीकत

 अवैध प्रवासी—एक अनदेखी हकीकत

अवैध प्रवासी वह नहीं होता जो सिर्फ सीमाएँ पार करता है,

वह वह इंसान होता है जो मजबूरियों की दीवारें पार करता है।

कभी भूख उसे धकेलती है, कभी डर उसे खींचता है,

और कभी हालात उसे उस रास्ते पर ले जाते हैं जिसे कानून नहीं पहचानता।


देश की सीमाएँ कागज़ पर खिंची होती हैं,

पर गरीबी और संकट की सीमाएँ दिल पर खिंची होती हैं।

अवैध प्रवासन केवल एक “अपराध” नहीं,

यह व्यवस्था, सुरक्षा और इंसानियत – तीनों की परीक्षा है।


सरकारें कानून बनाए रखती हैं,

लेकिन हर अवैध प्रवासी अपने भीतर एक कहानी ढोता है –

बिखरे घर की, टूटे सपनों की,

और उस उम्मीद की जो उसे अनजान ज़मीं तक ले आती है।

अवैध प्रवासी: सीमाओं से परे एक अनकही कहानी


कभी–कभी लोग सरहदें ऐसे पार करते हैं जैसे किसी रात का सन्नाटा पार कर रहे हों। न रोशनी साथ होती है, न पहचान, सिर्फ उम्मीद की गठरी और डर का घना बादल। यही लोग अवैध प्रवासी कहलाते हैं – वे यात्री जो कागज़ों पर मौजूद नहीं होते, लेकिन दुनिया के हर नक्शे के किनारों पर उनकी परछाइयाँ टंगी रहती हैं।


वे अपने देश से निकलते हैं किसी मजबूरी के धुएँ में लिपटे हुए – बेरोज़गारी, संघर्ष, हिंसा या टूटे हुए सपनों के दबाव में। पर दूसरी ओर मिलती है अनिश्चित ज़मीन, जहाँ कानून एक तंग गलियारा है और हर कदम पर खतरे की चरमराहट।


अवैध प्रवासी सिर्फ एक शब्द नहीं, यह हजारों अधूरी कहानियों का शीर्षक है।

कुछ कहानियाँ गुम हो जाती हैं फाइलों की धूल में,

कुछ समंदर की लहरें निगल लेती हैं,

और कुछ शहरों के शोर में बेमान से सांसें ढोती रहती हैं।


जब हम ‘अवैध’ कहते हैं, तो याद रखना चाहिए कि ग़ैरक़ानूनी होने का बोझ अक्सर उन कंधों पर होता है, जिनके पास चुनने का अधिकार ही नहीं था।


यह मुद्दा कानून का भी है, मानवता का भी, और उन सपनों का भी जो कभी जन्म ही नहीं ले पाए।


Saturday, November 8, 2025

Social convention/ सामाजिक सम्मेलन

"गलत दिशा में बढ़ रही भीड़ का हिस्सा बनने से बेहतर है सही दिशा में अकेले चले........."

मेरी कलम से....
   बहुत जल्द ही मैं इस पोस्ट पर अपना विचार शेयर करूंगा धन्यवाद,